Saturday, April 23, 2011
Friday, April 22, 2011
मिलले शराबी सैयां
शेर : शराब के नशवे में झुमेला ई दुनिया
सब कुछ बरबाद भईल बुझे ना ई दुनिया
“आशावादी” कहे की अबहूँ से सोचअ तू
शराबी के घर घर में रोए दुलहिनिया.
गीत: मिलले शराबी सैयां , इज्जत के नाश कईले
ए सखिया हे , सारा घर भईले बरबाद नु ए राम
नशवे में चूर रहस , गरिए से बात करस
ए सखिया हे, मीठी बोली खतिर मनवा तरसेला ए राम
गहना गुड़ियावा सब , खेते जायदाद बेचे
ए सखिया हे, गोदी के बालकवा कईसे जी ही नु ए राम
सावन भदउवा जईसे , बरसे नएनवा मोर
ए सखिया हे, आंखिया के लोरवा कभी ना सुखेला ए राम
कुहुकी कुहुकी चिरई , पिंजरा में रोवतारी
ए सखिया हे, पियवा के बोलिया गोलिया मरेला ए राम
“श्रीनाथ आशावादी” रोई रोई गीत लिखे
ए सखिया हे, कब होई बहुअन के उद्धार नु ए राम
“श्रीनाथ आशावादी”
सब कुछ बरबाद भईल बुझे ना ई दुनिया
“आशावादी” कहे की अबहूँ से सोचअ तू
शराबी के घर घर में रोए दुलहिनिया.
गीत: मिलले शराबी सैयां , इज्जत के नाश कईले
ए सखिया हे , सारा घर भईले बरबाद नु ए राम
नशवे में चूर रहस , गरिए से बात करस
ए सखिया हे, मीठी बोली खतिर मनवा तरसेला ए राम
गहना गुड़ियावा सब , खेते जायदाद बेचे
ए सखिया हे, गोदी के बालकवा कईसे जी ही नु ए राम
सावन भदउवा जईसे , बरसे नएनवा मोर
ए सखिया हे, आंखिया के लोरवा कभी ना सुखेला ए राम
कुहुकी कुहुकी चिरई , पिंजरा में रोवतारी
ए सखिया हे, पियवा के बोलिया गोलिया मरेला ए राम
“श्रीनाथ आशावादी” रोई रोई गीत लिखे
ए सखिया हे, कब होई बहुअन के उद्धार नु ए राम
“श्रीनाथ आशावादी”
Tuesday, April 19, 2011
भगवन तेरी एक लीला
एक जंगली भैंस
एक जंगल में
आठ नौ भूखे जंगली सियार
एक सियार नोचता है
भैंस के एक थान को
दर्द से कराहती भैंस
दूसरा सियार फोड़ता है
दूसरे थान को
दर्द से चित्कारती भैंस
फिर टूट पड़ते हैं सारे सियार
नोचते,फोड़ते
थान से छेद बनाते , छेद बढ़ाते
दर्द से बिलबिलाती भैंस
बढ़ते जाते सियार
फाड़ते जाते सियार
गिर पड़ती है भैंस
देखती है आँख खोले
पुरे होश में
शरीर फटते हुए
खून निकलते हुए
शरीर में सियारों को घुसते हुए
सियार लड़ते हैं
फाड़ते हैं पेट
झपटते हैं आपस में
नोचते हैं
अंतडियां निकालते हैं
लाड़ गिरातें हैं, चबातें हैं
मांस खातें हैं
घंटों-घंटों
चित्कारती है भैंस
पुकारती हैं भैंस
शायद तुझको भगवन
“बेनाम” इसमें तेरी गरिमा क्या है ?
भैंस के इस तरह मरने में तेरी महिमा क्या है ???
अजय अमिताभ सुमन
उर्फ
बेनाम कोहड़ाबाज़ारी
Saturday, April 16, 2011
अपवाद
सड़कों पे चलती महिलाओं पे बुरी नजर डालते हो
याद आती नहीं ?
तुम्हारी भी बीबी , बहन हैं , क्या इनकी
फरियाद नहीं सताती ?
पर ये अगर सड़कों पे चलती महिलाओं पे लाईन मारते हैं
तो ध्यान मत दो , इनकी और बात है
उपदेश औरों पे लागु होने के लिए होते हैं
कानून है समाज का , और ये अपवाद हैं .
अजय अमिताभ सुमन
उर्फ
बेनाम कोहड़ाबाज़ारी
समाज का हिस्सा
पापा सुरेश तो एक्जाम में फेल हो गया .
महेश को चीटिंग में जेल हो गया
गणेश स्कूल छोड़ने में रेल हो गया
और रमेश का इन सबसे मेल को गया
और आप पूछते हैं मेरा रिजल्ट
क्या मैं समाज का हिस्सा नहीं ?
अजय अमिताभ सुमन
उर्फ
बेनाम कोहड़ाबाज़ारी
काने को काना कहना
ये जो नगीना है
बड़ा सयाना है
देखो कि बांधे सर पे
केसरी बाना है
चलता है ऐसे जैसे
कोई वीर राणा है
सच में नगीना सिंह
बड़ा मरदाना है .
छोटा भी दुनिया में
बड़ा भी दुनिया में
ऊँच नीच जात पात
छुआ छुत दुनिया में
पर एक आँख से देखे सबकुछ
एक समान हीं माने सबकुछ
ऐसा मस्ताना है
भले हीं एक आंख का काना है
पर आना है बाना है
नगीना सिंह सच में
बड़ा वीर मरदाना है.
अजय अमिताभ सुमन
उर्फ
बेनाम कोहड़ाबाज़ारी
बड़ा सयाना है
देखो कि बांधे सर पे
केसरी बाना है
चलता है ऐसे जैसे
कोई वीर राणा है
सच में नगीना सिंह
बड़ा मरदाना है .
छोटा भी दुनिया में
बड़ा भी दुनिया में
ऊँच नीच जात पात
छुआ छुत दुनिया में
पर एक आँख से देखे सबकुछ
एक समान हीं माने सबकुछ
ऐसा मस्ताना है
भले हीं एक आंख का काना है
पर आना है बाना है
नगीना सिंह सच में
बड़ा वीर मरदाना है.
अजय अमिताभ सुमन
उर्फ
बेनाम कोहड़ाबाज़ारी
चार प्रोफेसनल्स के गोल
बॉस के जीवन का गोल
पैसा
बाई हुक ऑर बाई क्रुक.
तुम्हारे जीवन का गोल
पैसा
बट बाई हुक ओनली.
उसके जीवन का गोल
पैसा
विथ रेसपेक्टेड लाइफ स्टाइल.
और मेरे जीवन जीवन का गोल
ईश्वर
बट
पोस्टपोंडेड फार नेक्स्ट लाइफ .
अजय अमिताभ सुमन
उर्फ
बेनाम कोहड़ाबाज़ारी
पैसा
बाई हुक ऑर बाई क्रुक.
तुम्हारे जीवन का गोल
पैसा
बट बाई हुक ओनली.
उसके जीवन का गोल
पैसा
विथ रेसपेक्टेड लाइफ स्टाइल.
और मेरे जीवन जीवन का गोल
ईश्वर
बट
पोस्टपोंडेड फार नेक्स्ट लाइफ .
अजय अमिताभ सुमन
उर्फ
बेनाम कोहड़ाबाज़ारी
Thursday, April 14, 2011
कुहुकेला धीया के करेजवा
कुहुकेला धीया के करेजवा , त आंखिया से लोरवा झड़े ए राम.
होत भिनुसार विदईया में , सखिया सहेलिया रोए ए राम.
डोलिया दुअरिया लगईले कहारअ , पापी ठाड़े भईले ए राम.
सुसुकेली माई के गोदीया में , तनी ना अचरवा छोड़े ए राम.
छुटल जाला घर नईहरवा , सहेलि या के संगवा छोहे ए राम.
याद पड़े भाई के दुलरवा आ , बाबूजी के नेहिया साले ए राम.
सुसुकत डोली में बईठे बहुरिया , कहरवा उठाई लेलस ए राम.
“आशावादी” लिखत में लोड़ झडे, हाथ से कलमिया रुके ए राम .
“श्रीनाथ आशावादी”
आकाशवाणी पटना से रमेश्वर गोप द्वारा प्रसारित एवं दैनिक हिंदुस्तान पत्र की समीक्षा में प्रसंशित
Wednesday, April 13, 2011
छोटहन सा बचवा सयान हो जाला
दो चार आखर पढके बेईमान हो जाला.
आ छोटहन सा बचवा सयान हो जाला.
लईकन के बचपन में एने ओने भागल.
तोतली आवाज इनके बड़ा नीक लागल.
उहे जवानी में नीम के जुबान हो जाला.
आ छोटहन सा बचवा सयान हो जाला.
बचवा के मन में रहे ना एको पाप.
सपनों में गलती से कहे ना झूठो साच.
उहे बढ़ला पे झूठ के गतान हो जाला.
आ छोटहन सा बचवा सयान हो जाला.
लईका आउर लईकी के बचपन के साथ.
खेतवा में खेले कूदे डाल के हाथों में हाथ.
उहे जवानी में छुवे त बदनाम हो जाला.
आ छोटहन सा बचवा सयान हो जाला.
तुरंते लड़े आउर तुरंते मान जावे.
भागे लड़ाई करे फेनु लगे आवे.
उहे बढला पर बड़का अभिमान हो जाला.
आ छोटहन सा बचवा सयान हो जाला.
माँई बाबू से प्यार करे , करे परनाम .
अब देखीं दूर से हीं कईसे करे सलाम .
कि घरवा में जईसे मेहमान हो जाला .
आ छोटहन सा बचवा सयान हो जाला.
जाति आ पाति के बात ना माने.
धरम का ह देश का ह बात ना जाने.
बड़का में लोभ द्वेष के दोकान हो जाला.
आ छोटहन सा बचवा सयान हो जाला.
लईकन के प्रेम के धागा से लोग बांधल .
कि देवतो भी इनके पवित्रता के कायल .
उहे जवानी में झूठ के खदान हो जाला .
आ छोटहन सा बचवा सयान हो जाला.
दो चार आखर पढके बेईमान हो जाला.
आ छोटहन सा बचवा सयान हो जाला.
अजय अमिताभ सुमन
उर्फ
बेनाम कोहड़ाबाज़ारी
Saturday, April 9, 2011
ये पैसा हाय
पैसे के पीछे तू खुद को इतना क्यूँ भगाए .
इस पैसे ने देखो तुझको कैसे दिन दिखाए .
गद्दे मखमली घर तेरे पर नींद तुझे सताए
नेट-मोबाइल हाथों में पर , दोस्त नहीं घर आए.
बना लिए घर इतने सारे , और कितने मकान.
पर रहते इनमे तुम ऐसे , जैसे एक मेहमान .
फ्रिज टी. वी. कार आदि , भोगे सारे सुख .
लुटा दिए तुमने सारे , इनपे पेट की भूख .
म्यूजिक सिस्टम अनगिनत पर गीत नहीं हैं भाते .
ह्रदय रोग डाईबीटीज आदि तुम्हें बहुत सताते .
तेरे पैसे से आते मेवा पर खाते नौकर चाकर .
और तुझे टेबलेट ईन्जेक्सन देते डाक्टर आकर .
तेरा जीवन उत्पीड़न चिंता ,गम दुःख और हाय.
बेनाम हितैषी तेरा तुझको , सुझा रहा उपाय .
ये पैसा हीं इनके पीछे , ये सब इसका हीं है काम,
हर लूँ तेरे दुःख सारे कि मुझको दे दो पैसे तमाम .
अजय अमिताभ सुमन
उर्फ
बेनाम कोहड़ाबाज़ारी
Subscribe to:
Posts (Atom)


