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Saturday, October 8, 2011

सरल होने का प्रतिफल
















एक भैंस
जन्म लेती है
घास खाती है  
दूध देती है
दही देती है
घी देती है

वो झूठ नहीं बोल सकती
वो निंदा नहीं कर सकती
किसी का उपहास नहीं कर सकती

इसलिए बच्चे जनती है नि-स्वार्थ
ताकि आदमी को
दूध मिल सके
दही मिल सके
घी मिल सके

अंत में बूढी हो
चढ़ जाती है किसी कसाई के हाथ

क्योंकि भैंस कपटी नहीं होती
आदमी की तरह  
निज स्वार्थ साध नहीं सकती

अजय अमिताभ सुमन
उर्फ
बेनाम कोहड़ाबाज़ारी