Thursday, April 28, 2011

फूल से दुल्हिनियाँ अंगार बन जईहें



शेर : नारी जब सिंगार करे त फूल भी लजा जाला

नारी जब कठोर बने त पत्थर भी शरमा जाला
“आशावादी” कहे कि नारिये से युद्ध में
बड़े बड़े वीरन के पांव डगमगा जाला


गीत: जिनगी सवाँरेला अधिकार लेके रहिहें
फूल से दुल्हिनियाँ अंगार बन जईहें

मोम से मुलायम हई , पत्थर से कठोर हो
केहू खातिर अमृत हई, केहू खातिर जहर हो
बिगड़ल दुनिया ला ई माहूर बन जईहें
फूल से दुल्हिनियाँ अंगार बन जईहें


झाँसी के रानी के ई जान ताटे दुनिया
शान तुडली दुश्मन के मान ताटे दुनिया
झाँसी के रानी के अवतार बन जईहें
फूल से दुल्हिनियाँ अंगार बन जईहें


जगिहें बहिनियाँ त बड़ा उपकार होई
सचमुच में देश के आ घर के उद्धार होई
जे “आशावादी” के ई रहिया पे चलिहें
फूल से दुल्हिनियाँ अंगार बन जईहें




“श्रीनाथ आशावादी”






Monday, April 25, 2011

एक बस ड्राईवर
























किस किस की नज़र को हम देखें

हम सबकी नजर में रहते हैं
किस्मत ही ऐसी पाई है
हर वक्त सफर में रहते हैं






अजय अमिताभ सुमन
उर्फ
बेनाम कोहड़ाबाज़ारी

हमरो ससुरवा सखी बड़ा नीक लागेला




शेर : परिवार बनेला बहू के प्यार देला से

ससुरार सजेला दुलहिन के दुलार देला से
“आशावादी” के रउआ बतिया समझ ली
घर में बहार आए बहू के सत्कार देला से .


गीत: काहे दूँ बलमुआ सखी बड़ा मन भाएला
हमरो ससुरवा सखी बड़ा नीक लागेला

ससुर हउअन बाबूजी आ सास महतारी
छोटकी ननदिया हीय जनवो से प्यारी
गोदी के बालकवा के बोली मीठ लागेला
हमरो ससुरवा सखी बड़ा नीक लागेला


छोटका देवरा के बतिया निराला
हँसी हँसी बात करे मन मुसकला
बलमा के देखि देखि मन मुसकाएला
हमरो ससुरवा सखी बड़ा नीक लागेला


हम हंई सीताजी बलमुआ ह रामजी
हमरो जिनीगिया के उहे भगवानजी
प्रेमवा के नदिया में मनवा नहाएला
हमरो ससुरवा सखी बड़ा नीक लागेला


घरवा बहारेनी त भोरे के किरीनियाँ
अंगना में छिड्केले सोनवा के पनिया
“श्रीनाथ आशावादी” बड़ा मन लागेला
हमरो ससुरवा सखी बड़ा नीक लागेला



“श्रीनाथ आशावादी”






जानवर जानवर होता है



जानवर जानवर होता है

दूसरों का दिया हुआ नाम नहीं होता
झूठा कोई अभिमान नहीं होता
चूकि जानवर इंसान नहीं होता
इसीलिए जानवर जानवर होता है.


नोचता है , खोचता है
दूर से झपटता है
भूख लगती है
तो जान भी लेता है
चुकि जान को लेता है
इसीलिए जानवर जानवर होता है.


जब प्यार करता है तो प्यार करता है जानवर
दुलार करता है तो दुलार करता है जानवर
झूठा कोई ईमान नहीं होता
जानवर सच में बेईमान नहीं होता
चुकि जानवर कभी बेईमान नहीं होता
इसीलिए जानवर जानवर होता है.


ठोकता सलाम है हाथों को जोड़
दुश्मनों के हौसले को देता है तोड़
मालिक के खातिर जान को देता है
मालिक के जान को भगवान सा समझता है
चुकि जरूरत पड़ने पे जान को देता है
इसीलिए जानवर जानवर होता है.


झूठी बात ना समझता है जानवर
औरों की निंदा कर ना हँसता है जानवर
पूंछ डुलाके दिखता है प्यार
गुस्सा आये तो करता है वार
गाली देने को जुबाँ नहीं होती
किसी को नाहक नहीं बुरा भला कहती
क्योकि जानवर बेजुबान होता है
इसीलिए जानवर जानवर होता है.


जानवर कभी शैतान नहीं होता
जानवर का कोई भगवान नहीं होता
जानवर का कोई ना होता है वेश
आगे जाने की कोई नहीं रेस
जाति नहीं होती , धर्म नहीं होता ,
जानवर का कोई देश नहीं होता
चुकि जानवर का देश नहीं होता
इसीलिए जानवर जानवर होता है.



अजय अमिताभ सुमन
उर्फ
बेनाम कोहड़ाबाज़ारी

Saturday, April 23, 2011

बेजुबां



























अक्सर “बेनाम” वो खामोश हुआ करते हैं.
जुबाँ नहीं काम से जो खुद को बयाँ करते हैं.




अजय अमिताभ सुमन
उर्फ़
बेनाम कोहड़ाबाज़ारी

Friday, April 22, 2011

मिलले शराबी सैयां

शेर : शराब के नशवे में झुमेला ई दुनिया

सब कुछ बरबाद भईल बुझे ना ई दुनिया
“आशावादी” कहे की अबहूँ से सोचअ तू
शराबी   के    घर घर   में रोए दुलहिनिया.


गीत: मिलले शराबी सैयां , इज्जत के नाश कईले
ए सखिया हे , सारा घर भईले बरबाद नु ए राम

नशवे में चूर रहस , गरिए से बात करस
ए सखिया हे, मीठी बोली खतिर मनवा तरसेला ए राम

गहना गुड़ियावा सब , खेते जायदाद बेचे
ए सखिया हे, गोदी के बालकवा कईसे जी ही नु ए राम


सावन भदउवा जईसे , बरसे नएनवा मोर
ए सखिया हे, आंखिया के लोरवा कभी ना सुखेला ए राम


कुहुकी कुहुकी चिरई , पिंजरा में रोवतारी
ए सखिया हे, पियवा के बोलिया गोलिया मरेला ए राम


“श्रीनाथ आशावादी” रोई रोई गीत लिखे
ए सखिया हे, कब होई बहुअन के उद्धार नु ए राम



“श्रीनाथ आशावादी”


Tuesday, April 19, 2011

भगवन तेरी एक लीला
























एक जंगली भैंस

एक जंगल में
आठ नौ भूखे जंगली सियार
एक सियार नोचता है
भैंस के एक थान को
दर्द से कराहती भैंस
दूसरा सियार फोड़ता है
दूसरे थान को
दर्द से चित्कारती भैंस
फिर टूट पड़ते हैं सारे सियार
नोचते,फोड़ते
थान से छेद बनाते , छेद बढ़ाते
दर्द से बिलबिलाती भैंस
बढ़ते जाते सियार
फाड़ते जाते सियार
गिर पड़ती है भैंस
देखती है आँख खोले
पुरे होश में
शरीर फटते हुए
खून निकलते हुए
शरीर में सियारों को घुसते हुए
सियार लड़ते हैं
फाड़ते हैं पेट
झपटते हैं आपस में
नोचते हैं
अंतडियां निकालते हैं
लाड़ गिरातें हैं, चबातें हैं
मांस खातें हैं
घंटों-घंटों
चित्कारती है भैंस
पुकारती हैं भैंस
शायद तुझको भगवन


“बेनाम” इसमें तेरी गरिमा क्या है ?
भैंस के इस तरह मरने में तेरी महिमा क्या है ???




अजय अमिताभ सुमन
उर्फ
बेनाम कोहड़ाबाज़ारी

Saturday, April 16, 2011

अपवाद




सड़कों पे चलती महिलाओं पे बुरी नजर डालते हो

याद आती नहीं ?
तुम्हारी भी बीबी , बहन हैं , क्या इनकी
फरियाद नहीं सताती ?


पर ये अगर सड़कों पे चलती महिलाओं पे लाईन मारते हैं
तो ध्यान मत दो , इनकी और बात है
उपदेश औरों पे लागु होने के लिए होते हैं
कानून है समाज का , और ये अपवाद हैं .




अजय अमिताभ सुमन
उर्फ
बेनाम कोहड़ाबाज़ारी


समाज का हिस्सा




पापा सुरेश तो एक्जाम में फेल हो गया .

महेश को चीटिंग में जेल हो गया
गणेश स्कूल छोड़ने में रेल हो गया
और रमेश का इन सबसे मेल को गया
और आप पूछते हैं मेरा रिजल्ट
क्या मैं समाज का हिस्सा नहीं ?


अजय अमिताभ सुमन
उर्फ
बेनाम कोहड़ाबाज़ारी


काने को काना कहना

ये जो नगीना है

बड़ा सयाना है
देखो कि बांधे सर पे
केसरी बाना है
चलता है ऐसे जैसे
कोई वीर राणा है
सच में नगीना सिंह
बड़ा मरदाना है .


छोटा भी दुनिया में
बड़ा भी दुनिया में
ऊँच नीच जात पात
छुआ छुत दुनिया में

पर एक आँख से देखे सबकुछ
एक समान हीं माने सबकुछ
ऐसा मस्ताना है
भले हीं एक आंख का काना है
पर आना है बाना है
नगीना सिंह सच में
बड़ा वीर मरदाना है.


अजय अमिताभ सुमन
उर्फ
बेनाम कोहड़ाबाज़ारी