Saturday, March 5, 2011

अनाम

























शर्माजी कहते है

पिंटू की माँ 
जरा पानी लाना .

पति कहते है ,
अजी सुनती हो ,
मोजा कहाँ है ?

पिंटू कहता है ,
मम्मी मुझे टॉफी दिला दो .

और पड़ोसी कहते है ,
शर्माजी की बहु शालीन है .


वो बहु है ,
पत्नी है ,
मां है .

वो अनाम है ,
उसका कोई अपना नाम नही .





अजय अमिताभ सुमन

उर्फ
बेनाम कोहड़ाबाज़ारी

निढाल


























पूछा शराबी से मैं



है गम तुझे किस बात का ,


डूबा हुआ है अब तक


तू किस ख्याल में .



ज़माने की चाल से


परेशां मैं उम्र भर ,


फसाँ हुआ था अबतक ,


मुश्किल जंजाल मैं .



ज़माने की बातें भी


कहाँ कभी सुलझी है ,


अपनी हीं बातों में


दुनियां ये उलझी है .



तलाशते तलाशते


जवाब इस दुनियाँ का ,


बन गया था अक्सर


खुद हीं सवाल मैं .



होश में भी होकर


क्या करती ये दुनियाँ ,


क्या कहती ये दुनियाँ


क्या सुनती ये दुनियाँ .



कभी औरों पे हँसती है


कभी अपनों पे रोती है


रहा इसके तरीकों से


मैं बवाल में.



कि होश में रहकर भी


करना क्या काम है ,


झूठी मुठी बातें हीं


करती आवाम हैं .



बेहोशी में यारों


मजा है जन्नत का .


छोड़ो भी फँसे हो क्यों


इस मायाजाल में .



तेरी बातें मेरे


समझ के नाकाबिल है ,


जाहिल से लोग मुझे


कहते फिर जाहिल है .



बेनाम एक अर्ज है


गर निभ गयी है दुश्मनी तो


छोड़ दो अब जैसे भी


हूँ खुश फिलहाल मैं .



अजय अमिताभ सुमन



उर्फ


बेनाम कोहड़ाबाज़ारी



शादिया ना लिखले लिलार














































                                       










श्रीनाथ आशावादी

Friday, March 4, 2011

धिया के करेजवा साले ए राम

       
                          


















                                            


                     श्रीनाथ आशावादी

Wednesday, March 2, 2011

सरकारी पोलिसी

















रिक्शेवाले से लाला पूछा
चलोगे क्या फरीदाबाद .
उसने बोला झटाक से उठकर
बिल्कुल तैयार हूँ भाई साब.


मैं तैयार हूँ भाई साब
की सामान क्या है तेरे साथ ?
तोंद उठाकर लाला बोला
आया तो मैं खाली हाथ .


आया तो मैं खाली हाथ
की साथ मेरे घरवाली है .
और देख ले पीछे भैया
वो हथिनी मेरी साली है .


वो हथिनी मेरी साली है
कि क्या लोगे किराया ?
देख के तीनों लाला हाथी
रिक्शा भी चकराया.


रिक्शावाला बोला पहले
आजम लूँ अपनी ताकत .
दुबला पतला चिरकूट मैं तुम
तीनों के तीनों आफत .


तीनों के तीनों आफत पहले
बैठो तो इस रिक्शे पर
जोर लगा के देखूं मैं फिर
चल पाता है रिक्शा घर ?


चल पाता है रिक्शा घर
कि जब उसने जोर लगाया .
टूनटूनी कमर वजनी रिक्शा
चर चर चर चर चर्राया .


रिक्शा चर मर चर्राया
कि रोड ओमपुरी गाल
डगमग डगमग रिक्शा डोले
हुआ बहुत ही बुरा हाल.


हुआ बहुत ही बुरा हाल
कि लाला ने जोश जगाया .
ठम ठोक ठेल के रिक्शे ने
तो परबत भी झुठलाया .




परबत भी को झुठलाया
कि क्या लोगे पैसा बोलो ?
गस खाके बोला फिर रिक्शा
दे दो दस रूपये किलो .


दो दस रूपये किलो लाला
बोला समझा क्या सब्जी
मैं लाला इंसान हूँ भाई
साली और मेरी बीबी .


साली और मेरी बीबी
फिर बोला वो रिक्शेवाला .
ये तोंद नहीं मशीन है भैया
सबकुछ पचनेवाला .


सबकुछ पचनेवाला भाई
आलू बैगन टमाटर
कहाँ लिए डकार अभीतक
कटहल मुर्गे खाकर .


कटहल मुर्गे खाकर कि
सरकारी अजब किराया है .
शेखचिल्ली के रूपये दस
और दस हाथी का भी भाड़ा है ?


अँधेरी है नगरी भैया
और चौपट करार है.
एक तराजू हाथी,चीलर
तौले ये सरकार है .


एक आंख से देखे तौले
सबको अजब बीमार है .
इसी पोलिसी का अ़ब तक
रिक्शेवाला शिकार है .








अजय अमिताभ सुमन
उर्फ
बेनाम कोहड़ाबाज़ारी



Monday, February 28, 2011

जय हो


























जय हो , जय हो
नितीश तुम्हारी जय हो .
जय हो एक नवल बिहार की .
सुनियोजित विचार की .
और सशक्त सरकार की .
कि तेरा भाग्य उदय हो .
तेरी जय हो .


जाति-पाति पोषण के साधन
कहाँ होते ?
धर्मं आदि से पेट नहीं
भरा करते .


जाति पाति की बात करेंगे जो
मुह की खायेंगें .
काम करेंगे वही यहाँ
टिक पाएंगे .


विकास विकास और विकास
संकल्प सही तुम्हारा है .
शिक्षा और सुशासन चहुँ ओर
तुम्हारा नारा है .


हर गांव नगर घर और डगर डगर
हर रात दिन वर्ष और हर पहर
नितीश तुम्हारा यही सही है एक विचार
हो उर्जा का समुचित सुनियोजित संचार


रात घनेरी बीती
सबेरा आया है .
जन-गण मन में व्याप्त
नितीश का साया है .


गौतमबुद्ध की धरा
इस पावन संसार में .
लौट आया सम्मान
शब्द बिहार में .


हर गली गली में जोश
उमंग अब छाया है .
बलरहित बाहुबली
मलीन कान्त काया है .


है विश्वास नितीश भारत को
सबक सिखाओगे .
है विकास मंत्र जनतंत्र की
पाठ पढ़ाओगे.


है बात दिले बेनाम
काश ये हो पाता.
भारत को भी एक नितीश
गर मिल पाता.


फिर जाति –पाति करने वाले
मिट जायेंगे .
धर्मं आदि के जोंक कहाँ
टिक पाएंगे .


फिर भारत का परचम
चहुँ ओर लहराएगा .
आर्यावर्त का नाम
धरा पे छाएगा .


भारत को भी अब
नितीश की तलाश है .
सुधर नेता ही इस
देश कि आस है .


कुत्सित राजनीतिज्ञों का
बेनाम क्षय हो .
भारत तेरी शक्ति बढे
आसिमित अक्षय हो .
राष्ट्र को कोटि कोटि नमन
तेरी विजय हो .
तेरी जय हो, तेरी जय हो.






अजय अमिताभ सुमन
उर्फ
बेनाम कोहड़ाबाज़ारी

Saturday, February 26, 2011

जीने की राह


जीने की चाह जब साथ छोड़ जाती है .
जिंदगी अक्सर नई राह दिखा जाती है .








अजय अमिताभ सुमन
उर्फ
बेनाम कोहड़ाबाज़ारी

Thursday, February 24, 2011

तर्जुबा

तर्जुबा-ए-जिंदगी कुछ और नहीं दोस्तों
मासूमियत-ए-बचपन के खोने का नाम है .



अजय अमिताभ सुमन
उर्फ
बेनाम कोहड़ाबाज़ारी

बहता पानी

जीवन है दरिया एक , थम गए तो मर गए .
मैं सागर का पानी हूँ , बहना जानता हूँ .



अजय अमिताभ सुमन
उर्फ
बेनाम कोहड़ाबाज़ारी