Saturday, February 26, 2011
Thursday, February 24, 2011
तर्जुबा
तर्जुबा-ए-जिंदगी कुछ और नहीं दोस्तों
मासूमियत-ए-बचपन के खोने का नाम है .
अजय अमिताभ सुमन
उर्फ
बेनाम कोहड़ाबाज़ारी
मासूमियत-ए-बचपन के खोने का नाम है .
अजय अमिताभ सुमन
उर्फ
बेनाम कोहड़ाबाज़ारी
बहता पानी
जीवन है दरिया एक , थम गए तो मर गए .
मैं सागर का पानी हूँ , बहना जानता हूँ .
अजय अमिताभ सुमन
उर्फ
बेनाम कोहड़ाबाज़ारी
मैं सागर का पानी हूँ , बहना जानता हूँ .
अजय अमिताभ सुमन
उर्फ
बेनाम कोहड़ाबाज़ारी
अजनबी
क्यूँ आज भी हमारा , हमदम नहीं इस शहर में ,
ना पूछा किसी ने , ना हमसे बताया गया .
मुलाकातें होती रही , रिश्ते तो बनते रहे ,
ना किसी को थी जरूरत , ना हमसे निभाया गया .
दुनिया तेरे तरीकों ने , सताया बहुत हमें ,
समझ के नाकाबिल ना , हमको समझाया गया .
फासले बढते रहे , दिल-दिमागो के दरमियाँ ,
उलझनें सजती रहीं , ना हमसे सुलझाया गया .
बेनाम खुद से अजनबी हम , बन गए रफ्ता रफ्ता ,
रूठे जो खुद से खुद को , ना अब तक मनाया गया .
अजय अमिताभ सुमन
उर्फ
बेनाम कोहड़ाबाज़ारी
ना पूछा किसी ने , ना हमसे बताया गया .
मुलाकातें होती रही , रिश्ते तो बनते रहे ,
ना किसी को थी जरूरत , ना हमसे निभाया गया .
दुनिया तेरे तरीकों ने , सताया बहुत हमें ,
समझ के नाकाबिल ना , हमको समझाया गया .
फासले बढते रहे , दिल-दिमागो के दरमियाँ ,
उलझनें सजती रहीं , ना हमसे सुलझाया गया .
बेनाम खुद से अजनबी हम , बन गए रफ्ता रफ्ता ,
रूठे जो खुद से खुद को , ना अब तक मनाया गया .
अजय अमिताभ सुमन
उर्फ
बेनाम कोहड़ाबाज़ारी
हुकूमत
मेरे नाम में अचानक, ये क्या सूझी है तुझको ,
बदनाम मैं बड़ा हूँ , दे दूँ तुझे मैं कैसे .
जिंदगी से मुझको करने है सवाल कई
तुझे चाहिए जवाब , दे दूँ तुझे मैं कैसे .
मेरी कहानी में क्या तुम मांगते हो हिस्सा
अंजाम ईक बुरा हूँ दे दूँ तुझे मैं कैसे.
ताउम्र बस ख्वाबों को टूटते ही देखा
तुम मांगते हो वादा, दे दूँ तुझे मैं कैसे.
तुम्ही कहो क्या अपना कहूँ कोई इरादा .
गम हैं बहुत ज्यादा, दे दूँ तुझे मैं कैसे
मेरे जीवन पे मुझको कोई नहीं भरोसा .
मेरी मौत पे हुकूमत दे दूँ तुझे मैं कैसे .
अजय अमिताभ सुमन
उर्फ
बेनाम कोहड़ाबाज़ारी
बदनाम मैं बड़ा हूँ , दे दूँ तुझे मैं कैसे .
जिंदगी से मुझको करने है सवाल कई
तुझे चाहिए जवाब , दे दूँ तुझे मैं कैसे .
मेरी कहानी में क्या तुम मांगते हो हिस्सा
अंजाम ईक बुरा हूँ दे दूँ तुझे मैं कैसे.
ताउम्र बस ख्वाबों को टूटते ही देखा
तुम मांगते हो वादा, दे दूँ तुझे मैं कैसे.
तुम्ही कहो क्या अपना कहूँ कोई इरादा .
गम हैं बहुत ज्यादा, दे दूँ तुझे मैं कैसे
मेरे जीवन पे मुझको कोई नहीं भरोसा .
मेरी मौत पे हुकूमत दे दूँ तुझे मैं कैसे .
अजय अमिताभ सुमन
उर्फ
बेनाम कोहड़ाबाज़ारी
आखिर क्या रखा है नाम में
वो कहते हैं
नाम में रखा है क्या ?
आँख का अंधा नाम नयनसुख
रख ले भी तो क्या ?
कि नाम है किरोड़ीमल
पर पैसे को तरसते हैं .
देखो दीनदास हाथी पे
मौज कर चलते हैं .
पर पूछते है मुझसे वो
कहता जो रावण उनको .
कि कौन सी मैं दुश्मनी
रहा हूँ निभा ?
अजय अमिताभ सुमन
उर्फ
बेनाम कोहड़ाबाज़ारी
नाम में रखा है क्या ?
आँख का अंधा नाम नयनसुख
रख ले भी तो क्या ?
कि नाम है किरोड़ीमल
पर पैसे को तरसते हैं .
देखो दीनदास हाथी पे
मौज कर चलते हैं .
पर पूछते है मुझसे वो
कहता जो रावण उनको .
कि कौन सी मैं दुश्मनी
रहा हूँ निभा ?
अजय अमिताभ सुमन
उर्फ
बेनाम कोहड़ाबाज़ारी
Saturday, June 13, 2009
मरहूम
खुदा के दीदार से यूँ ही नहीं रहा वो मरहूम ,
तमाम उम्र गुजरी उसकी , छत उजाडने में , सवारने में ।
अजय अमिताभ सुमन
उर्फ़
बेनाम कोहडा बाजारी
तमाम उम्र गुजरी उसकी , छत उजाडने में , सवारने में ।
अजय अमिताभ सुमन
उर्फ़
बेनाम कोहडा बाजारी
Thursday, May 28, 2009
कवि बनने की कोशिश
कविता करने से कौन रोक रहा है यार ।
कविता लिखने का तुझे पुरा है आधिकार ।
ये भी है ठीक कि तेरे भीतर का कलाकार ।
जग रहा है ये जगना भी मुझे है स्वीकार ।
गिला बस इस बात का कि अंदरूनी कलाकार ।
कर रहा है बार बार , बार बार और लगातार ।
कविता कि आत्मा का ऐसा बलात्कार ।
जैसे कि रीन की सफेदी की चमकार ।
हर बार , बार बार , बार बार और लगातार ।
अजय अमिताभ सुमन
उर्फ़
बेनाम कोहडा बाजारी
कविता लिखने का तुझे पुरा है आधिकार ।
ये भी है ठीक कि तेरे भीतर का कलाकार ।
जग रहा है ये जगना भी मुझे है स्वीकार ।
गिला बस इस बात का कि अंदरूनी कलाकार ।
कर रहा है बार बार , बार बार और लगातार ।
कविता कि आत्मा का ऐसा बलात्कार ।
जैसे कि रीन की सफेदी की चमकार ।
हर बार , बार बार , बार बार और लगातार ।
अजय अमिताभ सुमन
उर्फ़
बेनाम कोहडा बाजारी
Saturday, May 23, 2009
जलन
प्रॉब्लम इस बात में नही है
कि वो बड़ा आदमी है ,
प्रॉब्लम इस बात में है
की वो अपने आप को बड़ा आदमी समझता है ।
प्रॉब्लम इस बात में नही है
कि वो अपने आप को बड़ा आदमी समझता है ,
प्रॉब्लम इस बात में है
कि वो जितना बड़ा आदमी है ,
अपने आपको उससे बड़ा आदमी समझता है ।
प्रॉब्लम इस बात में भी नही है
कि वो जितना बड़ा आदमी है ,
अपने आपको वो उससे बड़ा समझता है ।
प्रॉब्लम इस बात में है
कि अपने आपको जितना बड़ा आदमी समझता है
उससे अपने आपको ज्यादा बड़ा आदमी दिखाता है ।
प्रॉब्लम इस बात में भी नही है
कि वो अपने आपको ज्यादा बड़ा दिखाता है ,
प्रॉब्लम दरअसल इस बात में है
कि वो जो कुछ भी दिखाता है ,
मुझे सब कुछ दीखता है ।
प्रॉब्लम इस बात में भी नही है
कि वो जो कुछ भी दिखाता है
मुझे सब कुछ दिखाता है ,
प्रॉब्लम दरअसल इस बात में है
कि मुझे जो भी दिखाता है
वो सब मुझे खलता है ।
अजय अमिताभ सुमन
उर्फ़
बेनाम कोंहड़ाबाजारी
कि वो बड़ा आदमी है ,
प्रॉब्लम इस बात में है
की वो अपने आप को बड़ा आदमी समझता है ।
प्रॉब्लम इस बात में नही है
कि वो अपने आप को बड़ा आदमी समझता है ,
प्रॉब्लम इस बात में है
कि वो जितना बड़ा आदमी है ,
अपने आपको उससे बड़ा आदमी समझता है ।
प्रॉब्लम इस बात में भी नही है
कि वो जितना बड़ा आदमी है ,
अपने आपको वो उससे बड़ा समझता है ।
प्रॉब्लम इस बात में है
कि अपने आपको जितना बड़ा आदमी समझता है
उससे अपने आपको ज्यादा बड़ा आदमी दिखाता है ।
प्रॉब्लम इस बात में भी नही है
कि वो अपने आपको ज्यादा बड़ा दिखाता है ,
प्रॉब्लम दरअसल इस बात में है
कि वो जो कुछ भी दिखाता है ,
मुझे सब कुछ दीखता है ।
प्रॉब्लम इस बात में भी नही है
कि वो जो कुछ भी दिखाता है
मुझे सब कुछ दिखाता है ,
प्रॉब्लम दरअसल इस बात में है
कि मुझे जो भी दिखाता है
वो सब मुझे खलता है ।
अजय अमिताभ सुमन
उर्फ़
बेनाम कोंहड़ाबाजारी
Saturday, May 2, 2009
परसेप्शन
नागफनी की नजर में ,
नागफनी ना तो खुबसूरत है ,
और ना ही बदसूरत ।
नागफनी कांटेदार है ,
और बस कांटेदार ही है ।
अजय अमिताभ सुमन
उर्फ़
बेनाम कोहडाबाजारी
नागफनी ना तो खुबसूरत है ,
और ना ही बदसूरत ।
नागफनी कांटेदार है ,
और बस कांटेदार ही है ।
अजय अमिताभ सुमन
उर्फ़
बेनाम कोहडाबाजारी
Subscribe to:
Posts (Atom)
