Saturday, May 2, 2009

परसेप्शन

नागफनी की नजर में ,
नागफनी ना तो खुबसूरत है ,
और ना ही बदसूरत ।

नागफनी कांटेदार है ,
और बस कांटेदार ही है ।



अजय अमिताभ सुमन
उर्फ़
बेनाम कोहडाबाजारी

Thursday, April 9, 2009

प्रश्न

मैंने पूछा
अपने गाँव कि बड़की माई से ,
कि
कैसे आप जिन्दा है
बिना पड़े ,
एक किताब भी .

तो उन्होंने कहा
ठीक वैसे ही ,
जैसे कि
तू जिन्दा है
बिना लिए
एक बीडी का एक कश भी.

बेनाम कोहडाबाजारी
उर्फे
जय अमिताभ सुमन

Saturday, February 7, 2009

शहर का आदमी

रोज सबेरे उठकर सोते हुए बेटे के माथे का चुम्बन लेता हूँ ,
नहाता हूँ , खाता हूँ ,
और चल पड़ता हूँ दिन की लडाई के लिए ।

लड़ता हूँ दिनभर अथक ,
ताकि
पत्नी को मिले सुकून,
बेटे को दुलार ,
भाई को स्नेह ,
और माता पिता को सम्मान ।

फ़िर लौटता हूँ घर ,
देर रात को ,
हाथ धोता हूँ , खाता हूँ ,
सोए हुए बेटे के माथे का चुम्बन लेता हूँ,
और सो जाता हूँ ।

मैं दूर रहता हूँ आपनों से ,
अपनों के वास्ते।


बेनाम कोंहड़ाबाजारी
उर्फ़
अजय अमिताभ सुमन


Thursday, January 29, 2009

इल्जाम

कड़कती ठंढ थी बड़ी , था दिसम्बर का महिना ।
घनेरी धुंध में मुश्किल , हुआ था ठीक से चलना ।

इसी दिल्ली की सर्दी में , जीने के वास्ते भाई ।
गया था मैं भी अपने , ऑफिस के रास्ते भाई ।

निकलता मुख से था धुआं व सिमटे हुए थे लोग ।
मेरे माथे पे थी टोपी , और सिने पे ओवरकोट ।

इसी कड़कती ठंढ में , देखा कोई था चिथड़े में ।
कुडे से लेके छिलके , केले के डाल जबड़े में ।

कुत्तों से कर रहा था छिना झपटी कुडे के वास्ते ।
खुदा तू ही बता में क्या लिखूं अब तेरे वास्ते ।

माना सबकुछ मिला मुझको तेरी इस दुनिया में ।
फ़िर भी शिकायत है मुझे , इस तेरी दुनिया से ।

उस इंसान का चेहरा सिने से उतरता नहीं ।
है बेहतर कुत्तों की हालत , उस इंसान से कहीं ।

क्यूँ कर नसीबों वाले ऐसे इस जहाँ में है आते ।
खुदा में दे रहा इल्जाम इन अभागों के वास्ते ।



बेनाम कोहडाबाजारी
उर्फ़
अजय अमिताभ सुमन

Tuesday, January 27, 2009

हाय रे टेलीफोन

टिकट के वास्ते सिनेमाहाल को , लगाया मैंने फ़ोन ।
बजी घंटी ट्रिंग ट्रिंग तो पूछा है भाई कौन ।

पूछा है भाई कौन कि तीन सीट क्या खाली है ।
मैं हूँ मेरी बीबी है और साथ में साली है ।

उसने कहा तीन सीट कि क्या करते है हिसाब ।
पुरी जगह ही खाली है, सपरिवार आइये जनाब ।

मैंने पूछा किस जगह से बोल रहे हो श्रीमान ।
उसने कहा मैं भुत हूँ , घर मेरा शमशान ।

हाय रे टेलीफोन , ये कैसी तेरी माया ।
देखना था चलचित्र , तुने शमशान पहुँचाया ।

बेनाम कोंहड़ाबाजारी
उर्फ़
अजय अमिताभ सुमन

Sunday, January 25, 2009

फितरते इंसान

फ़ितरते इन्सान , ना समझे बेनाम
ये सोचता कुछ और , कहता कुछ और , और करता कुछ और ।



बेनाम कोह्डाबाजारी
उर्फ़्
अजय अमिताभ सुमन

Friday, January 23, 2009

बुरा एहसास

बुरा लगा था मुझे
बचपन में
मेरा अपनी क्लास में आना चतुर्थ
और
मेरी बहन का प्रथम आना ।

एक बार फ़िर बुरा लगा है मुझे
मेरा बन जाना इंजिनियर
और
मेरी बहन का
उसकी ससुराल में चूल्हे बर्तन धोना ।

बेनाम कोहडाबाजारी
उर्फ़
अजय अमिताभ सुमन

Tuesday, January 20, 2009

मेरी परिभाषा

प्यार करोगे
तो प्रेमी हूँ ,
गर दुलार
तो स्नेही हूँ ।

हताश हूँ
फटकार पे ,
निराश हूँ
दुत्कार पे ।

उपहास से हूँ
क्लेशग्रस्त ,
और परिहास से
द्वेषत्रस्त ।

नफरत
तिरस्कार का ,
इबादत
उपकार का ।

अनादर पे
रोष हूँ मैं ,
प्रसंशा पे
मदहोश हूँ मैं ।

हार का
संताप हूँ ,
जीत की
उल्लास हूँ ।

सम्मान हूँ
जहाँ आदर है ,
अभिमान हूँ
जहाँ सादर है ।

भरोसे का
विश्वास हूँ मैं ,
उत्साही की
आस हूँ मैं ।

भावों के संसार निरंतर
और इनके संप्रेषण ,
कर रहा परिलक्षित हूँ मैं
एक प्रतिबिंबित दर्पण ।


बेनाम कोहडाबाजारी
उर्फ़
अजय अमिताभ सुमन

Saturday, January 17, 2009

लव कॉमपेन

फंसी जीवन की नैया मेरी , बीच मझधार की तरह ।
तू दे दे सहारा मुझको , बन पतवार की तरह ।

तेरी पलकों की मैंने जो , छांव पायी है ।
मेरी सुखी सी बगिया में, हरियाली छाई है ।
तेरा ये हंसना है या की , रुनझुन रुनझुन ।
खनखनाना कोई , वोटों की झंकार की तरह ।

तेरे आगोश में ही , रहने की चाहत है ।
तेरे मेघ से बालों ने, किया मुझे आहत है ।
मेजोरिटी कौम की हो तुम , तो इसमे मेरा क्या दोष।
ये इश्क नही मेरा , पॉलिटिकल हथियार की तरह ।

हर पॉँच साल पे नही , हर रोज वापस आऊंगा ।
तेरी नजरों के सामने हीं, ये जीवन बिताउंगा ।
अगर कहता हूँ कुछ तो , निभाउंगा सच में हीं ।
समझो न मेरा वादा , चुनावी प्रचार की तरह ।

जबसे तेरे हुस्न की , एक झलक पाई है ।
नही और हासिल करने की , ख्वाहिश बाकी है ।
अब बस भी करो ये रखना दुरी मुझसे ।
जैसे जनता से जनता की सरकार की तरह ।

प्रिये कह के तो देख , कुछ भी कर जाउंगा ।
ओमपुरी सड़क को , हेमा माफिक बनवाऊंगा ।
अब छोड़ भी दो यूँ , चलाना अपनी जुबां ।
विपक्षी नेता का संसद में तलवार की तरह ।

चेंज की है पार्टी तो, तुझको क्यों रंज है ।
पोलिटीकल गलियों के, होते रास्ते तंग है ।
चेंज की है पार्टी , पर तुझको न बदलूँगा।
छोडो भी शक करना , किसी पत्रकार की तरह ।

बड़ी मुश्किल से गढा ये बंधन , इसे बनाये रखना ।
पॉलिटिकल अपोनेनटो से , इसे बचाये रखना ।
बस फेविकोल से गोंद की , तलाश है ऐ भगवन।
की टूटे न रिश्ता अपना , मिली जुली सरकार की तरह ।

फसी जीवन की नैया मेरी , बीच मझधार की तरह ।
तू दे दे सहारा मुझको , बन पतवार की तरह ।

बेनाम कोंहराबाजारी
उर्फ़
अजय अमिताभ सुमन

Tuesday, January 13, 2009

जरुरत

उसने करके खबरदार , मारा बेनाम को ।
बेईमानी में इमान की जरुरत कुछ कम नही ।


बेनाम कोह्डाबाजारी
उर्फ़्
अजय् अमिताभ सुमन